तुम कौन हो?

01-02-2020

तुम कौन हो?

राजनन्दन सिंह

तैमूरी लुटेरों की लूट-खसोट
अतातायी आक्रमणकारियों के 
नादिरशाही आतंक 
अत्याचारों ने
जितना मुझे लहुलुहान नहीं किया
अँग्रेज़ी इशारों पर
देशी घोड़ों के टापों ने भी
उतने गहरे घाव नहीं दिये
जितनी तुम्हारे झूठ, सहानुभूति 
और छद्मनिष्ठा ने दिये हैं
सुनहरे केंचुल में लिपटे सँपोले
किस ज़हरीली सर्पिनी
के विष गर्भ से निकले
गंदे, घिनौने विष-व्याल!
मातृहंते
तुम कौन हो?
कौन हो तुम !
जो अपने विषदंत के विष से
हमें विषाक्त कर 
हमारी धरती पर लोट रहे हो
हमारी धरती को लूट रहे हो
तुम कौन हो

0 टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

किशोर साहित्य कविता
बाल साहित्य कविता
कविता
हास्य-व्यंग्य कविता
नज़्म
विडियो
ऑडियो