समभाव का  यथार्थ

01-04-2021

समभाव का  यथार्थ

राजनन्दन सिंह

लोग 
अपेक्षा रखते हैं
व्यवस्था से
अधिकारियों से नेता से
उनसे हम से आप से
निष्पक्षता की, न्याय की
समदर्शिता समभाव की
यथार्थ यह है 
कि पिता भी नहीं देखता
अपने सभी पुत्रों को  
समान नज़रों से
समान भाव से
महाराज दशरथ के प्राण
ज्येष्ठ पुत्र वियोग ने लिये थे
आठवें तारणहार की आशा में
अपने छः पुत्र कंस को
स्वयं यदुवीर 
वासुदेव ने सौंप दिये थे 

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