फागुन आया होगा

15-03-2021

फागुन आया होगा

राजनन्दन सिंह

आम पे छाया होगा मंजर
महुआ बौराया होगा
गंध लिये मदमाता फागुन
गाँव मेरे आया होगा
गेहूँ की हरियाली ऊपर
बाली शोभ रही होगी
रंग बसंती पीला-पीला
सरसों लहराया होगी
पात विहीन डारी पर कोमल
किसलय मोह रही होगी
सोह रहा होगा नव पल्लव
तरु ऊपर आया होगा
वहीं कहीं से छुप-छुप कोयल
कूहू-कूहू करती होगी
गाँव का बचपन ढूँढ़-ढूँढ़ उस
कूऽक को दुहराया होगा
फूटे होंगे गान फाग के
उठे राग रंग-तरंग में
हवा बसंती ने भी संग-संग 
गीत कोई गाया होगा
यहाँ शहर में कहाँ है फागुन
कहाँ है कोयल फाग कहाँ
नागफनी फन, फूल से बढ़
फूलदान के मन भाया होगा

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