कविता और मैं 

01-04-2021

कविता और मैं 

राजनन्दन सिंह

मैं कला प्रेमी हूँ
मैं कविता प्रेमी हूँ
प्रेम
जो एक सुकोमल भावना है
कला में निखरती है
कविता में उतरती है
कला 
जो स्वतः प्रेम है
कविता 
जो वास्तव में एक भावना है
भावनाओं की अंजली
जिसे प्रेम कहते हैं
प्रेम 
जब कला का रूप लेती है
ताजमहल बनती है
और कविता 
जब प्रेम का रूप लेती है
तो मीराबाई
जिसे राधा की तरह
दर्शन की आस नहीं 
प्रेम की प्यास होती है
प्रेम 
कला
कविता
और
मैं
 

0 टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

कविता
सम्पादकीय प्रतिक्रिया
हास्य-व्यंग्य कविता
किशोर साहित्य कविता
बाल साहित्य कविता
नज़्म
विडियो
ऑडियो

विशेषांक में