आज और बीता हुआ कल

01-11-2020

आज और बीता हुआ कल

राजनन्दन सिंह

हर आज 
समझता है कि वह
बीते हुए कल से
दस क़दम आगे है
यह तो अच्छी बात है
मैं चाहता हूँ आनेवाला आज 
अपने को बीस क़दम आगे सोचे
पर यह न भूले कि उसका पाँव
बीते हुए कल के कंधे पर है
वरना वह वहाँ होता 
जहाँ से बीते हुए कल ने
चलना सीखा था।

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