हवा देखो इशारे कर रही है

15-01-2026

हवा देखो इशारे कर रही है

डॉ. शोभा श्रीवास्तव (अंक: 292, जनवरी द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

1222    1222    122

 

 हवा देखो इशारे कर रही है।
 कहीं बिजली यकायक गिर गई है।
 
ज़रा बचना वो हैं बदनाम गलियाँ,
सबा भी बदचलन दिखने लगी है।
 
तुम्हारा नाम लेता है वो अक्‍सर,
कहो कितनी पुरानी दोस्ती है।
 
जो जी में आ गया वह कर रहे हैं,
किसे मालूम क्या नेकी- बदी है।
 
ज़माना रंग कितने ही दिखाए,
मगर कायम हमारी सादगी है।
 
कभी कुछ हम किसी से कह न पाए,
सज़ा चुप रहने की उसने जो दी है।
 
अगर तेवर नहीं ग़ज़लों में "शोभा"
भला किस काम की फिर शायरी है।

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