दिल तो है चाक शार के मारे
डॉ. शोभा श्रीवास्तव
बहर: ख़फ़ीफ़ मुसद्दस मख़बून महज़ूफ़ मक़तू
अरकान: फ़ाएलातुन मुफ़ाइलुन फ़ेलुन
तक़्तीअ: 2122 1212 22
दिल तो है चाक शार के मारे
बारहा तुझ से रार के मारे
बे-वफ़ाई नसीब में शामिल
बेहया तेरे ज़ार के मारे
गुल तिरी जुल्फ़ में लगा देता
पर मैं बेबस हूँ ख़ार के मारे
बोझ बच्चे को तुम न दो इतना
टूट जाए न भार के मारे
शाम सिमटी हुई किताबों सी
वो है दिलकश बयार के मारे
तोड़कर दिल गया वो है जब से
नींद आई न ख़्वार के मारे
फिर कभी वो नहीं दिखा'शोभा'
प्यार में अपनी हार के मारे
चाक=विदीर्ण, छलनी, फटा हुआ
शार=तकरार, झगड़ा, बदी, उपद्रव, फूट
बारहा=बार-बार, प्रायः, बहुधा
रार=लड़ाई, झगड़ा, टंटा, हुज्जत
ज़ार=अशक्त, हानिकर
ख़ार=काँटा, फाँस
बयार=हवा का हल्का धीमा ठंडा झोंका
ख़्वार=अपमान, तिरस्कार, निष्फल मेहनत
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