छोड़ो व्यर्थ पानी बहाना . . . 

01-04-2025

छोड़ो व्यर्थ पानी बहाना . . . 

प्रियंका सौरभ (अंक: 274, अप्रैल प्रथम, 2025 में प्रकाशित)

 

बारिश को अब आने दो। 
तपती गर्मी जाने दो॥
 
छोड़ो व्यर्थ पानी बहाना, 
जीवन को बच जाने दो॥
 
ये बादल भी कुछ कह रहे। 
इनको मन की गाने दो॥
 
कटते हुए पेड़ बचाओ। 
शुद्ध हवा कुछ आने दो॥
 
पंछी क्या कहते हैं सुन लो। 
उनको पंख फैलाने दो॥
 
फोटो में ही लगते पौधे। 
सच को बाहर लाने दो॥
 
होती कैसे धरा प्रदूषित। 
सबको पता लगाने दो॥
 
पौध लगाकर पानी दें हम। 
सच्चा धर्म निभाने दो॥
  
चल चुकी है बहुत आरियाँ। 
धरती कुछ बच जाने दो॥
 
कैसे अब हरियाली होगी। 
सौरभ प्रश्न उठने दो॥
 
झुलस रही पावन धरती पर। 
हरियाली तुम आने दो॥
 

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