ब्राह्मण 

01-04-2021

चुनाव प्रचार चरम पर था। नेता जी एक गाँव में अपनी चुनावी सभा में भाषण दे रहे थे। जज़्बात की रौ में बहते हुए वे बोले, "ब्राह्मणों के साथ होने वाले किसी भी ज़ुल्म को हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। मेरी कोशिश यही रहेगी कि सभी ब्राह्मणों को दलितों की तरह सरकारी नौकरी में आरक्षण मिले। मुझे ये भी पता चला है कि . . ." 

अभी वे अपनी बात पूरी कर पाते कि उनका एक समर्थक उनके कान में फुसफुसाया, "साहब, ये दलितों का गाँव है।" 

वे तपाक से बोले, "तो क्या हुआ? मेरे लिए तो मेरा प्रत्येक मतदाता ब्राह्मण है।" 

0 टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

लघुकथा
सांस्कृतिक कथा
स्मृति लेख
विडियो
ऑडियो

विशेषांक में