किसानों को राहत के बजट में 50 प्रतिशत रील के लिए

15-11-2025

किसानों को राहत के बजट में 50 प्रतिशत रील के लिए

वीरेन्द्र बहादुर सिंह  (अंक: 288, नवम्बर द्वितीय, 2025 में प्रकाशित)

 

राहत की रक़म तय करने की बैठक में बेक़ाबू हँसी की बरसात!

“मित्रो! फिर किसानों को राहत देने का अवसर आया है,” एक सरकारी अधिकारी ने उल्लास से कहा। 

दूसरे अधिकारी बोले, “बिलकुल सही। आफ़त में से अवसर निकालना तो हमारी नीति है। किसानों पर आफ़त और हमारे लिए मौक़ा।”

तीसरे अधिकारी ने मुस्कुराते हुए कहा, “हम तो हमेशा काम ही ऐसा करते हैं कि किसानों को राहत माँगनी ही पड़े।”

चौथे अधिकारी ने सचाई स्वीकारते हुए कहा, “भाई, हम ठीक से काम नहीं करते, इसीलिए ही किसानों को राहत माँगनी पड़ती है।”

तभी पाँचवें अधिकारी बचाव में बोले, “उहूँ, इंसान चाहे कुछी करे, भगवान कुछ और कर देता है। हम काम करें या न करें, भगवान ऐसी स्थिति बना ही देते हैं कि किसानों को राहत माँगनी पड़ जाए।”

छठे अधिकारी ने ज्ञान बघारा, “हम जैसे अधिकारी भी तो किसानों पर भगवान की ओर से थोपी गई आफ़त ही हैं।”

हँसी का फ़व्वारा फूट पड़ा। 

तभी एक अधिकारी बोला, “वाह यार! ऐसे डॉयलाग कहाँ से लाते हो? कॉमेडी फ़िल्मों से?” 

वह अधिकारी बोला, “बॉलीवुड में अब कॉमेडी बची कहाँ है? वहाँ तो सिर्फ़ हारर-कॉमेडी बची है। ऐसे डॉयलाग मैं उससे भी ज़्यादा हारर शो से लाता हूँ, हमारे नेताओं के चुनावी भाषणों से।”

एक अधिकारी गंभीर हुआ, “चलो, अब असली काम पर आते हैं, किसानों के लिए राहत का बजट तय करें।”

एक आलसी अधिकारी पसरते हुए बोला, “राहत की घोषणा के कार्यक्रम, नेताजी के भाषण, स्वागत और बाद के भोज के लिए बड़ा बजट ज़रूर रखना।”

दूसरा अधिकारी बोला, “मेरा विनम्र सुझाव है कि राहत की रक़म का 50 प्रतिशत तो सिर्फ़ राहत की घोषणा की सोशल मीडिया रील बनाने में ही ख़र्च करो। आजकल जनता को भी तो रीलों में ही रुचि है। और अब तो यह भी मान्यता प्राप्त है कि रील बनाना भी एक बड़ा रोज़गार है।”

तभी एक जूनियर अधिकारी बोला, “लेकिन सर, हमारे प्रिय सोशल मीडिया इनफ़्लुएंसर अब रील के लिए बहुत बड़ा बजट माँगते हैं। अगर उन्हें लेना है तो राहत का बजट और बढ़ाना पड़ेगा।”

वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “इसकी चिंता मत करो। अब तो नेताजी इतने सेवाभावी हो चुके हैं कि वे ख़ुद ही रील में काम करने को तैयार हो जाते हैं। बजट भी बचा और काम भी हो गया।”

फिर कमरे में फिर से हँसी का तूफ़ान गूँज उठा। 

नया चुनावी वादा: हम किसानों की मदद के लिए अत्यंत तत्पर हैं। किसानों को राहत मिले, इसके लिए अगर बर्फ़ीला ओला वृष्टि न भी हुई हो, तब भी हम कृत्रिम बारिश करने के प्रयोग करेंगे, पर राहत देकर ही दम लेंगे। 

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