सब चंगा सी

दिलीप कुमार (अंक: 291, जनवरी प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

हाल के दिनों में क्रिकेट की दुनिया ने काफ़ी उथल-पुथल देखी। अब क्रिकेट में सिर्फ़ एक ही चीज़ स्थायी है वह है भारत और पाकिस्तान के मुक़ाबले में पाकिस्तान की हार। भले ही मैच किसी भी फ़ॉर्मैट और किसी भी पिच पर खेला गया हो। इस स्थायी सत्य के अलावा क्रिकेट के अनिश्चिताओं भरे इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि टूर्नामेंट जीतने वाले देश की टीम बग़ैर ट्राफी के लौटी हो और फ़ाइनल हारने वाली टीम का बंदा ट्राफी दबाए बैठा हो। 

क्रिकेट के एशिया कप में ऐसा ही हुआ जहाँ टीम इंडिया ने ट्राफी जीती लेकिन एशिया कप पाकिस्तान के गृहमंत्री और एशियन क्रिकेट काउंसिल के चेयरमैन मोहसिन नकवी दबाए बैठे हैं। इस अनूठी घटना के अलावा इस बरस भारत में क्रिकेट प्रेमियों ने भी ख़ूब दिलचस्प नज़ारे देखे। 

जैसे कि आईपीएल की सबसे चर्चित टीम आरसीबी (रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर) ने अठारह सालों के लंबे इंतज़ार के बाद आईपीएल की ट्रॉफी जीत ली। आरसीबी के फ़ैन क्रिकेट की दुनिया में सबसे वफ़ादार फ़ैन माने जाते रहे हैं। यहाँ तक कि आरसीबी के फ़ैन्स को क्रिकेट की दुनिया में अब इंग्लैंड के मशहूर क्रिकेट फ़ैन समूह बार्मी आर्मी से भी ज़्यादा लायल माना जाता है। अठारह साल का इंतज़ार कम नहीं होता। क़ानूनी तौर पर अठारह साल की उम्र के बाद इंसान बालिग़ हो जाता है और माना जाता है कि एक पीढ़ी बदल गयी। पर नहीं बदला तो आरसीबी के फ़ैन्स का भरोसा कि आरसीबी एक न एक दिन आईपीएल ट्राफी ज़रूर जीतेगी और इसे विराट कोहली जितवाएँगे। कुछ ऐसे आरसीबी के जबरा फ़ैन ठहरे हँसमुख बरार। हँसमुख पंजाब में रहने वाला एक एक्स क्रिकेटर था और आरसीबी तथा विराट कोहली का ज़बरदस्त फ़ैन था। वह एक दिलेर पंजाबी था। हालाँकि इस बरस आईपीएल के फ़ाइनल में किंग्स इलेवन पंजाब को आरसीबी ने ही हराया था। हँसमुख को पंजाब के हारने का दुख तो था मगर विराट और आरसीबी के जीतने की ख़ुशी उसे दुगुनी थी। हँसमुख ने अपने युवावस्था में क़सम खाई थी कि जब तक आरसीबी कप नहीं जीत लेता तब तक वह विवाह नहीं करेगा। इस चक्कर में बरस पर बरस बीत गए। उसके घर आने वाले रिश्ते बरस दर बरस कम होते गए। 

बस स्कूल के दिनों से उसे पसंद करने वाली कली कौर थी जो अभी भी अविवाहित थी। कली कौर भी एक्स क्रिकेटर थी लेकिन अब अपनी बेकरी चलाती थी। कभी कली कौर और हँसमुख बरार बचपन में एक ही साथ क्रिकेट खेला करते थे। दोनों ही इंडिया लेवल तक खेलना चाहते थे। मगर तक़दीर का लेखा कुछ और भी था। कली कौर ने भी अब तक शादी नहीं की थी क्योंकि उसके घरवाले उसका विवाह कैनेडा में करना चाहते थे और वह इंडिया में रहकर क्रिकेटर बनना चाहती थी। हँसमुख और कली दोनों ही कामयाब प्रोफ़ेशनल क्रिकेट नहीं बन सके। अपनी कामयाबी का पीछा करते हुए उन दोनों ने अपना घर नहीं बसाया था। दोनों चालीस की दहलीज़ पर थे। दोनों को ही विवाह प्रस्ताव आने बंद हो गए थे। मगर दोनों में एक फ़र्क़ था। 

जहाँ हँसमुख आरसीबी को ट्राफी जीतते हुए देखना चाहता था। वहीं कली कौर आरसीबी की टीम से खेलकर उसे जितवाना चाहती थी। मगर दोनों की चाह पूरी न हो सकी। कविवर नीरज के शब्दों में:

“चाह तो निकल सकी ना, 
हाय उम्र ढल गई।” 

नतीजतन अब दोनों क्रिकेट प्रेमी बन कर रह गए हैं। कली कौर साहिबा बेकरी चलाती हैं और हँसमुख सिंह साहब हँस-हँस के टैक्सियों को चलवाने का बिज़नेस करते हैं। दो बरस पहले जब आरसीबी की महिला टीम आईपीएल जीत गयी तो हँसमुख को लोगों ने कहा कि अब तो शादी कर लो काहे कि तुम्हारी ज़िद आरसीबी को जिताने की थी। पुरुषों या महिलाओं की आरसीबी की टीम के भेद की बात तो तुमने क़सम खाते हुए कही नहीं थी। मगर हँसमुख ठहरा एक दम से लायल और पक्का वाला आरसीबी फ़ैन। उसने अपनी भीष्म प्रतिज्ञा दोहराई, “आईपीएल के पहले सीज़न में जब मैंने आरसीबी के ट्राफी जीतने को लेकर क़सम खाई थी तब वीमेन आईपीएल होता ही नहीं था। सो क़सम से कोई भी कम्प्रोमाइज़ नहीं। जब विराट कोहली की आरसीबी जीतेगी तभी क़सम पूरी होगी।” 

और इस साल विराट कोहली की आरसीबी आईपीएल की ट्राफी जीत गई। 

जैसे ही विराट कोहली की आरसीबी ने आईपीएल की ट्राफी जीती वैसे ही हँसमुख को अपनी शादी की फ़िक्र होने लगी। चालीस की उम्र के बाद शादी इतनी आसान नहीं होती। रिश्ते तो आने से रहे तो हँसमुख को अपने बचपन का प्यार याद आया। उसने इंस्ट्राग्राम पर वीडियो अपलोड करते हुए एक्स क्रिकेटर और अपनी पुरानी दोस्त कली कौर को टैग किया और प्रपोज़ करते हुए कहा:

“कली, तुम तो मुझे बचपन से जानती हो और यह भी जानती हो कि मैं चालीस की उम्र पार कर चुका हूँ। मेरे दिल की पिच में सिर्फ़ क्रिकेट था। अब दिल की पिच पर क्रिकेट के बाद पैवेलियन में जो थोड़ी सी जगह बची है। उसमें मैं तुम्हें स्पेस देना चाहता हूँ। बाक़ी लड़के टुक्सीडो पहनते हैं, गुलाब लेकर आते हैं, घुटनों पर बैठते हैं और रोमांटिक गानों के बीच कहते हैं:

“विल यू मैरी मी।” 

लेकिन मैं ठहरा आरसीबी का लायल फ़ैन और विराट कोहली का अंध-भक्त। मैंने विराट कोहली से सीखा है कि गेम में नो शॉर्ट कट। चाहे जीत हो हार हो अंतिम गेंद तक न तो मैदान छोड़ना है और न ही उम्मीद। तो आज . . . इस ज़िंदगी के मैदान में बड़ी उम्मीद से मैं अपनी आरसीबी वाली जर्सी में तुमसे अपने दिल की बात कहता हूँ कि जैसे अठारह साल से आरसीबी को आईपीएल की ट्राफी की तलाश थी वैसे ही आरसीबी के कप जीतने पर ही मुझे मैरिज करनी थी। विराट कोहली की आरसीबी ट्राफी जीत चुकी है तो मुझे अब अपने ज़िन्दगी की पिच तैयार करनी है। 

मुझे तुमको देखकर उतनी ही ख़ुशी मिलती है जितनी कि विराट कोहली को सेंचुरी मारते हुए देखने पर मिलती है। तुम्हें देखकर दिल करता है कि इस वक़्त की नो बॉल हो जाये और ये लम्हा लौट-लौट कर मेरे पास दुबारा आये। तुम मेरी ज़िन्दगी की वो सुपर ओवर हो जो कितना भी छोटा क्यों न हो पर उसमें थोड़ी देर के लिए ही सही पर उसमें पूरी ज़िंदगी समा जाती है। तुम्हारी स्माइल मुझ पर ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम की पेस बैटरी की तिकड़ी जैसी बिजली गिराती है जो है तो ख़तरनाक मगर उतनी ही शानदार भी। 

तुम्हारे साथ वक़्त बिताना ऐसा है जैसे एबी डी विलियर्स की 360 डिग्री बैटिंग करते देखना—हर बॉल पर नई उम्मीद, हर पल में नई ख़ुशी। दिल करता है कि तुम्हारी मुस्कुराहट एबी डी विलियर्स की तरह मैदान की चारों तरफ़ समा जाए औऱ मैं नॉन स्ट्राइकर एंड पर खड़े होकर तुम्हें निहारता रहूँ। ज़िन्दगी में आरसीबी के 263 की तरह नाट आउट का सुख हो या उसी टीम के 49 पर आल आउट होने का दुख हो। जैसे विराट कोहली ने आरसीबी के साथ हर सीज़न साथ निभाया है वैसे ही हर वक़्त मैं भी तुम्हारे साथ कनसिस्टेंट रहूँगा। और आख़िर में ये कह रहा हूँ कि जिस तरह आरसीबी के फ़ैन कहते हैं ‘ई साला कप नमदे।’ उसी तरह मैं तुमसे कहना चाहता हूँ ‘ई साला दुलहन नमदे’ यानी विल यू मैरी मी।” 

जितनी देर में क्रिकेट के मैच में उछाला गया टॉस का सिक्का नीचे आता है उतनी ही देर में कली कौर का इंस्टाग्राम पर जवाब आ गया: 

“सब चंगा सी।” 

कली का इकरार सुनकर हँसमुख गुलाब सा खिल उठा और फिर खिलखिलाकर हँस पड़ा।

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