एक और निर्भया  

01-11-2020

एक और निर्भया  

सुभाष चन्द्र लखेड़ा

मातादीन को पत्नी ने कल रात भोजन के बाद ऐसा कुछ बताया कि वे फिर रात भर सो न पाए। यूँ तो पिछले कुछ दिनों से उन्हें अपनी सोलह वर्षीया बेटी स्वाति के चेहरे से लग रहा था कि वह किसी उधेड़बुन खोयी रहती है लेकिन तब उन्होंने सोचा था कि किशोरावस्था में बच्चे अक़्सर बहुत से शारीरिक परिवर्तनों से जूझ रहे होते हैं। फलस्वरूप, उन्होंने स्वाति से कुछ भी नहीं पूछा। बहरहाल, कल रात पत्नी ने उन्हें बताया कि पिछले कई दिनों से उस कॉलोनी का एक चर्चित बदमाश निक्का अपने साथियों के साथ स्वाति को जब भी मौक़ा मिलता, तंग कर रहा था। मातादीन रात भर विचार करते रहे कि उन्हें सुबह इस मामले को सुलझाने के लिए क्या करना होगा ?

ख़ैर, वे सुबह उठे और निक्का की तलाश में निकल पड़े। निक्का वहीं पास में एक पान-बीड़ी के खोखे के पास सिगरेट के कश खींच रहा था। जैसे ही वे उसके पास पहुँचकर कुछ बोलते कि तभी निक्का बोल पड़ा, "ससुर जी, आज सुबह-सुबह इधर कैसे?" 

अंदर से आहत मातादीन चुपचाप वापस लौट पड़े। दिन में उनकी पत्नी ने उन्हें थाने में रिपोर्ट करने की सलाह दी। वे तुरंत ही थाने पहुँचे। जैसे ही वे थाने के अहाते में पहुँचे, उन्हें यह देखकर आश्चर्य हुआ कि निक्का चौकी इंचार्ज के साथ सिगरेट फूँकते हुए ठहाके लगा रहा था। वे बोझिल क़दमों से वापस लौटते हुए अब उन वादों के बारे में सोच रहे थे जो निर्भया कांड के बाद सरकार ने जनता से किये थे।  

0 टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

आप-बीती
सांस्कृतिक कथा
कविता - हाइकु
लघुकथा
स्मृति लेख
विडियो
ऑडियो

विशेषांक में