पी तो लेने दो यह जाम जो बाक़ी है

15-04-2026

पी तो लेने दो यह जाम जो बाक़ी है

सुनील कुमार शर्मा  (अंक: 295, अप्रैल द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

पी तो लेने दो यह जाम जो बाक़ी है, 
यह तो ना कहो बस इतना ही काफ़ी है। 
 
ऊपर चाँद-तारे हाथ में यह जाम, 
चलती यह हवाएँ मेरा तो साकी है। 
 
तुम ना आओ तो मेरा क्या कुछ बिगड़ेगा, 
मेरे तक तुम्हारी याद जो आती है। 
 
जिनको मैं बुलाता ना था वो भी आए, 
ऐसे तो मुसीबत ही कोई आती है। 
 
शहनाई बजी तो पूछा क्या है यार, 
बोले तेरे ही तो यार की शादी है। 
 
जो करना है कर लो उसको भी जलना है, 
जिस दीपक में ना तो तेल है ना बाती है। 

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