पी तो लेने दो यह जाम जो बाक़ी है
सुनील कुमार शर्मा
पी तो लेने दो यह जाम जो बाक़ी है,
यह तो ना कहो बस इतना ही काफ़ी है।
ऊपर चाँद-तारे हाथ में यह जाम,
चलती यह हवाएँ मेरा तो साकी है।
तुम ना आओ तो मेरा क्या कुछ बिगड़ेगा,
मेरे तक तुम्हारी याद जो आती है।
जिनको मैं बुलाता ना था वो भी आए,
ऐसे तो मुसीबत ही कोई आती है।
शहनाई बजी तो पूछा क्या है यार,
बोले तेरे ही तो यार की शादी है।
जो करना है कर लो उसको भी जलना है,
जिस दीपक में ना तो तेल है ना बाती है।
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