कह रही हैं मेरे दिल से निकली आहें

15-05-2026

कह रही हैं मेरे दिल से निकली आहें

सुनील कुमार शर्मा  (अंक: 297, मई द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 
2122    2122    2122
 
कह रही हैं मेरे दिल से निकली आहें, 
हम भी उन सपनों को क्यों भूलाना चाहें
 
उस समन्दर के किनारे भी तो ना थे, 
जिसके ऊपर थी कभी अपनी निगाहें
 
ना कोई मंज़िल थी ना ही कारवां था, 
साथ मेरे चल रही थी बस हवाएँ 
 
बिजलियाँ जो बादलों से निकल आएँ, 
तो कभी रोशन हो जाएँ अपनी राहें। 
 
आगे जो बढ़ता है गिरने से क्यों डरता, 
थाम लेगा वोही जिसकी लम्बी बाँहें। 

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