नाख़ून

सुनील कुमार शर्मा  (अंक: 293, मार्च प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

प्राथमिक कक्षा के विद्यार्थी, हाथ आगे किए एक लाइन में खड़े थे।

अध्यापिका उनके हाथों के नाख़ून देख रही थी। जैसे ही उसकी निग़ाह, एक बच्चे के ज़रा से ज़्यादा लम्बे नाख़ूनों पर पड़ी, उसने ग़ुस्से से उस बच्चे को डाँटते हुए कहा, “नालायक! इतने लम्बे नाख़ून . . .” एक ज़ोरदार थप्पड़ उसके मुँह पर दे मारा।

बच्चे ने डरकर, एक दम से अपना मुँह पीछे हटा लिया, जिससे मैडम के आधा इंच लम्बे नाख़ून उसके चेहरे को रगड़ते हुए निकल गए। उस बच्चे के चेहरे से ख़ून की लाल-लाल बूँदें टपकने लगीं। वह घबराकर, मैडम के नाख़ूनों को देखता रह गया। 

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