चित भी मेरी, पट भी मेरी

01-06-2019

चित भी मेरी, पट भी मेरी

सुभाष चन्द्र लखेड़ा

 रघुनंदन जी ने सरकारी सेवा से निवृत होने के बाद अपने लिए जो फ़्लैट ख़रीदा, उसमें पत्नी रमा को एक साथ बहुत सी कमियाँ नज़र आ रहीं थीं। वे सरकारी नौकरी के दौरान हमेशा ऐसे फ़्लैटों में रहे जहाँ हर तरह की सुविधाएँ मौजूद थीं। हमेशा प्रथम तल के सरकारी फ्लैटों में रहने वाले रघुनंदन जी और उनकी पत्नी का यह फ़्लैट पाँचवी मंज़िल पर था और ऊपर से एक परेशानी यह भी थी कि जिस ब्लॉक में उनका फ़्लैट था, उसमें लिफ़्ट तीसरी मंज़िल तक थी। ख़ैर, कुछ महीनों तक जब-तब रमा जी रघुनंदन जी को फ़्लैट को ख़रीदने में बरती गयी लापरवाही को लेकर कुछ न कुछ कहती रहीं लेकिन साल पूरा होते-होते उनका यह सत्तर लाख का फ़्लैट सीधे एक करोड़ का हो गया। 

अब रमा जी अक्सर लोगों को यह बताना नहीं भूलती कि इस फ़्लैट को उनके पति ने उनके कहने से ही ख़रीदा था अन्यथा रघुनंदन जी का इरादा तो किराए के मकान में रहने का था।   

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