मुसाफ़िरों से राष्ट्रीय राजमार्गों पर ढाबे वाले मनचाहे पैसे वसूल कर मालामाल हो रहे हैं और यदि कोई उनके ख़िलाफ़ शिकायत करता है तो सरकार या पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती है। इस समाचार को बाबा सुबह से तीसरी बार पढ़ रहा था और फिर उसके दिमाग़ में एक नया विचार पनपने लगा। आख़िर, रात में सोने से पहले उसने निर्णय ले लिया था कि कल उसे क्या करना है।

अगले दिन लोगों ने देखा कि खतौली बाइपास से कुछ आगे "बाबा का ढाबा" भी खुल गया था।

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