आख़िरी सीख

15-02-2017

उसे ग़लतियों से सीखने का शौक़ था। इसलिए वह पूरी ज़िंदगी ग़लतियाँ करता रहा। बहरहाल, एक दिन उसका यह सीखने का तरीक़ा थम गया। उस दिन वह एक पुल के ऊपर से उसके नीचे बहने वाली नदी को देख रहा था। उसे लगा उसे उस नदी के साफ़ जल में नहाना चाहिए। वह अपने को रोक न पाया और उस पुल से कूद गया। यह उसका दुर्भाग्य था कि उस जगह नदी बहुत गहरी थी और उसे तैरना नहीं आता था।

ख़ैर, गहरे जल में दम तोड़ते हुए उसने अपनी ज़िंदगी की आख़िरी सीख भी मिल गयी थी। नदी में तभी कूदो जब तुम्हें तैरना आता हो।

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