बहाना

सुनील कुमार शर्मा  (अंक: 296, मई प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

वह दफ़्तर जाने के लिए गाँव के बस अड्डे पर खड़ा, बस का इंतज़ार कर रहा था। तभी गाँव का एक लड़का अपनी साइकिल रोककर बोला, “साथ वाले गाँव के सामने, रोड पर एक स्कूल बस पलट गई है . . . बहुत से बच्चे घायल हुए हैं।” 

उसने तुरंत फोन जेब से निकाला, “हैलो . . . हैलो . . . मेरे गाँव के पास एक स्कूल बस पलट गई है . . . गाँव के बहुत से बच्चे घायल हो गए हैं . . . आज मैं नहीं आ सकता।” 

फिर वह, फोन जेब में रखकर, शरारत भरी हँसी-हँसते हुए बोला, “यार! तूने ऐसी ख़बर दी कि छुट्टी का बहाना मिल गया।” 

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