राजीव कुमार – 019
राजीव कुमार
1
बढ़ी दबीश
ज़ोर आज़माइश
जन्मी ख़लिश।
2.
मन बदला
बदली न रंगत
जैसी संगत।
3.
पढ़ी जिसने
जीवन की किताब
पहेली बना।
4.
ख़ाली न हुआ
सुख का सरोवर
किसी की दुआ।
5.
सघन वन
मानव का प्रवेश
खोया जीवन।
6.
वन प्रक्षेत्र
बचाओ हे त्रिनेत्र
वन सफ़ाया।
7.
मनगढ़ंत
रोचक समावेश
कथा जीवंत।
8.
हद न देखे
जद्दोजेहद कभी भी
हो चाहे जो भी।
9.
हक़ की बात
सिर्फ़ हो शुरूआत
सब हैं साथ।
10.
देता उधार
अपना अंश मार
सुनता झाड़।
11.
नेकी की राह
चलना मुश्किल
बताना आसान।
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