कैसी ये प्यास
प्रीति अग्रवाल 'अनुजा'
1.
प्यासे नयन
अपलक जोहते
बाट तुम्हारी।
2.
कर प्रतीक्षा
थक रही थी रैना
नैना सजग।
3.
घुप्प अँधेरा
रातों में भर रहीं
यादें उजास।
4.
पग के काँटे
पलकों चुन चुन
तुम में छाँटे।
5.
जो कह पाते
हम दिल की बात
जुदा हालात।
6.
प्रभु तू काहे
बिछड़े न मिलता
यूँ ही सताता।
7.
मिट्टी की देह
जन्म भर सजायी
मिट्टी में मिली।
8.
हृदय बसिया
तुम मनभावन
पी हो रसिया।
9.
तुम हो धुरी
इर्द गिर्द घूमती
पी मैं तुम्हारे।
10.
एक ही राह
प्रियतम हमारी
मंज़िल एक।
11.
हठीला मन
किस विध न माने
चाँद ही माँगे।
12.
ढली है साँझ
कल ही की तरह
लगे नई–सी।
13.
प्रेम के बाण
नैनों की तरकश
हृदय घायल।
14.
मिलन आस
जीने दे, न मरने
कैसी ये प्यास।
15.
तुम्हें जो पाया
मानो चाँद सिमटा
बाँहों में आया।
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