घास का उगना 

01-05-2026

घास का उगना 

महेश कुमार केशरी  (अंक: 296, मई प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 


दुनिया की सबसे कमज़ोर चीज़ों में गिनी जाती है घास
माल-मवेशी सबको घास चाहिए होता है 
खाने के लिए 
घास खाकर ही गाय दूध देती है 
दूध पीकर ही मानव फलता-फूलता है 
घास, साग-पात आधार है जीवन का 
 
युद्ध की जब-जब बात की जाती है 
तो याद किया जाता है उस साल को 
कि उस दिन को भर-भर कोसा जाता है 
उस वीभत्स समय का उदाहरण दिया जाता है 
इतिहास में ये कहकर कि 
उस साल का युद्ध बड़ा भयानक था 
उस साल के युद्ध के बाद धरती पर 
कई-कई सालों तक घास नहीं उगी 
जब लोग ये कह रहे होते हैं 
तब इसी धरती पर कहीं उग रही होती है 
घास 
बारूद के सीने को फाड़कर! 

0 टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

कविता
कहानी
हास्य-व्यंग्य आलेख-कहानी
हास्य-व्यंग्य कविता
लघुकथा
विडियो
ऑडियो

विशेषांक में