खोया वो सतरंगी फागुन 

01-03-2026

खोया वो सतरंगी फागुन 

डॉ. सुकृति घोष (अंक: 293, मार्च प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

पथ में हाय कहीं खो गया, मेरा वो सतरंगी फागुन
जाने कब से ढूँढ़ रही हूँ, अल्हड़ वो अतरंगी फागुन
 
दुनियादारी भीड़ में शायद, पीर नदी के तीर में शायद, 
सपनों के जंगल में शायद, अपनों के दंगल में शायद, 
भूलभुलैया राह में शायद, उहापोह के द्वंद्व में शायद, 
लिप्सा के पर्वत में शायद, स्पर्धा के अर्णव में शायद, 
 
पथ में हाय कहीं खो गया, मेरा वो सतरंगी फागुन
जाने कब से ढूँढ़ रही हूँ, अल्हड़ वो अतरंगी फागुन
 
आडंबर के पंक में शायद, दंभ दिखावा जंग में शायद, 
घोर तिमिर के तम में शायद, अवसादों के ग़म में शायद, 
व्याकुलता संघर्ष में शायद, आतुरता उत्कर्ष में शायद, 
धूसर कंटक वन में शायद, अभिलाषा उपवन में शायद
 
पथ में हाय कहीं खो गया, मेरा वो सतरंगी फागुन
जाने कब से ढूँढ़ रही हूँ, अल्हड़ वो अतरंगी फागुन

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