अनकही

राहुलदेव गौतम (अंक: 271, फरवरी द्वितीय, 2025 में प्रकाशित)

 

पहली बार में मोबाइल बजा! 
बयालिस सेकेंड, 
रिसीव नहीं कर पाया। 
दूसरी बार बजा! 
पैंतीस सेकेंड . . . रिसीव किया! 
हाँ,! कौन? 
 . . . उस तरफ़ से आवाज़ नहीं सिर्फ़ मौन। 
 
कुछ सेकेंड के बाद
मैं भी मौन! 
चार मिनट तैंतीस सेकेंड
बीत गए, 
बस सुन रहे थे . . .! 
एक-दूसरे का चिर परिचित मौन
यह मौन ही जानता था
उस तरफ़ कौन है, 
इस तरफ़ कौन है। 

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