सुबह को भूलना चाहता हूँ

साँझ में बसियाए घाव को

भूलना चाहता हूँ

अपने अनगिनत अभिलाषाओं से

दूर जाना चाहता हूँ

अपने असीम पीड़ा से

छुटकारा पाना चाहता हूँ

बस किसी तरह तेरी यादों से

दूर होना चाहता हूँ

हाँ!

खिड़की से लटकते सूरज को

अंतिम प्रत्यक्ष देखना चाहता हूँ

घुटती साँसों से पहले

ब्लड प्रेशर बढ़ने से पहले

अपने उलझे कोलाहल से

एक सन्नाटा चाहता हूँ

बस रात होने से पहले

मुझ पर मेरा रोग

'अल्ज़ाइमर' हावी हो जाए

और

कुछ क्षण से अधिक

आन द स्पॉट

मैं सब कुछ भूल जाऊँ . . .

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