जर्जर झरे मुँडेर पर

समय के आघात से लहूलुहान

नित नवीन अँधेरों में

चुपचाप बैठा

एक नए सवेरे के,

इंतज़ार में बाॅ॑ग देता

एक अंतहीन मुर्गा हूँ।

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