चौंसठ गाँवों के चौधरी की बेटी की शादी थी। दो सौ के क़रीब बारात आयी थी। चौधरी ने बारात की ख़ातिरदारी में कोई क़सर नहीं छोड़ी थी। उसने सभी बारातियों को एक-एक मुट्ठी चाँदी के सिक्के दिए थे। बारातियों मे हो  रही अपनी तारीफ़ सुनने के लिए, चौधरी भेष बदलकर चुपके से बारातियों के बीच मे पहुँच गया। एक बाराती कह रहा था, “यह चौधरी साला एक-एक मुट्ठी और चाँदी के सिक्कों की दे देता तो कम से कम मेरा एक बैल तो आ जाता।”

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