कान्हा हमारे

15-09-2026

कान्हा हमारे

डॉ. प्रीति सुरेंद्र सिंह परमार (अंक: 302, सितम्बर द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

मुरली मनोहर श्याम हमारे 
श्यामल तन हैंं, नैना कजरारे, 
मुरली मनोहर अधरों पर सजे
एक पुकार में दौड़े आते 
हँसते सदा, सदा मुस्काते। 
 
राधा रानी के प्यारे हैं, 
ब्रज के राज दुलारे हैं। 
माथे पर मोर-पंख सजे, 
मन में प्रेम के दीप जले। 
 
पीताम्बर तन पर लहराए, 
देखत ही मन हरषाए। 
माखन चुराएँ, मन भी चुराएँ, 
भक्तों के हर कष्ट मिटाएँ। 
 
ग्वाल-बाल के संग विचरें, 
यमुना तट पर रास रचाएँ। 
गोपियों के मन के मोहन, 
सबके हृदय में प्रेम जगाएँ।
  
सुदामा जब द्वार पे आए, 
दीन दशा में शीश झुकाए। 
मित्र वही जो दर्द पहचाने, 
बिन कहे ही मन की जाने। 
 
राजमहल में मित्र को पाकर, 
कृष्ण लगे आँसू बरसाने। 
सुदामा के चरण पखारे, 
मित्र-धर्म के पाठ पढ़ाएँ। 
 
द्रौपदी की लाज बचाने वाले, 
अर्जुन के सारथी कहलाने वाले। 
धर्म की रक्षा हेतु धरा पर आए, 
गीता का अमर ज्ञान सुनाएँ। 
 
मोर-पंख धारी, मुरली वाले, 
दीन-दुखी के रखवाले। 
जिसने मन से नाम पुकारा, 
कृष्ण ने उसका हाथ सँभाला। 
 
राधा के मनमोहन प्यारे, 
हम सबके भी नाथ तुम्हारे। 
बस इतनी कृपा बनाए रखना—
चरणों में अपने लगाए रखना। 
 
श्यामल तन है, कजरारे नैन, 
मुरली मनोहर अधरों पर। 
सबके दुख तुम हर ले जाते 
एक पुकार में दौड़े आते, 
हँसते सदा, सदा मुस्काते। 

राधे-राधे जपे जो प्राणी, 
उसके संग रहें मुरलीधारी। 
जय श्रीकृष्ण, जय नंदलाला, 
जय राधे के प्यारे गिरधारी। 

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