गांधारी का मौन रहना
डॉ. प्रीति सुरेंद्र सिंह परमार
गांधारी तुम, विदुषी थी
अनभिज्ञ नहीं ज्ञानी थी॥
स्त्री हो कर भी तुमने
स्त्री का अपमान कराया॥
भाई भाग भाई ने खाया
सफल कभी हो ना पाया॥
ग़लत राह पर चलने पर
ग़लत का साथ निभाया॥
भरी सभा में चीर हरण
कौरवों का नाश कराया॥
करनी अच्छी होती है तो
नाम भी जग में होता है॥
नारी का किया अपमान
तो वंश नाश ही होता है॥
सत्ता की लोलुपता ने
छल करके जीत ना पाया॥
करने षड्यंत्र और प्रपंच
चक्रधारी को बैरी बनाया॥
दुर्योधन और दुशासन का
नाम नहींं दोबारा पाया॥
0 टिप्पणियाँ
कृपया टिप्पणी दें
लेखक की अन्य कृतियाँ
- हास्य-व्यंग्य आलेख-कहानी
-
- अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस और असली हक़ीक़त
- अपराध की एक्सप्रेस: टिकट टू अमेरिका!!
- अस्त्र-शस्त्र
- आओ ग़रीबों का मज़ाक़ उड़ायें
- आहार दमदार आज के
- एमबीबीएस बनाम डीआईएम
- कचरा संस्कृति: भारत का नया राष्ट्रीय खेल
- काम क्यों करें?
- गर्म जेबों की व्यवस्था!
- चंदा
- जनसंख्या नियंत्रण: अब कोई योजना नहीं, बस हालात
- झुकना
- टमाटर
- टीवी डिबेट: बहस कम, तमाशा ज़्यादा
- ड्रम युग: आधुनिक समाज का नया फ़र्नीचर
- ताक़तवर कौन?
- देश के दुश्मनों की देशभक्ति
- पेट लवर पर होगी कार्यवाही
- मज़ा
- यमी यमी मिल्क राइस
- रीलों की दुनिया में रीता
- रफ़ा-दफ़ा
- विदेश का भूत
- विवाह आमंत्रण पिकनिक पॉइंट
- विवाह पूर्व जासूसी अनिवार्य: वरमाला से पहले वेरिफ़िकेशन
- संस्कार एक्सप्रेस–गंतव्य अज्ञात
- सावित्री से सपना तक . . .
- होली का हाहाकारी हाल: जब रंगों ने पहचान ही मिटा दी!
- क़लम थामी जब
- फ़ंड का रहस्यमयी कुंड: सरकार भेजती है, धरती निगल जाती है!
- कविता
-
- अपने हक़ को जाने
- एक सीट ख़ाली है
- कान्हा
- गांधारी का मौन रहना
- नदी
- नदी और नारी
- पन्ना धाय
- पापा की यादें
- प्रार्थना
- बस रह गई तन्हाई
- माता–पिता की वृद्धावस्था: एक मौन विलाप
- मानव तुम कहलाते हो
- शिक्षक
- सभ्यता के कफ़न में लिपटी हैवानियत: एक महाकाय व्यंग्य
- सावन आया
- सावन मनभावन
- स्त्री—हर युग में कटघरे में
- हमारे वृद्ध
- हिंदुस्तान महान है
- सांस्कृतिक आलेख
- हास्य-व्यंग्य कविता
- अनूदित कविता
- नज़्म
- चिन्तन
- कहानी
- लघुकथा
- विडियो
-
- ऑडियो
-