विशेषांक: दलित साहित्य

10 Sep, 2020

मैं स्त्री, तुम पुरुष
तुम लड़के, मैं लड़की
मैं पत्नी, तुम पति
ज़रा बताओ तो
तुम्हारे और मेरे बीच
केवल 'इंसान' होने का
भाव मौजूद क्यों
नहीं?
 
मोर
मुझे 'मोर' से ज़्यादा
चिड़िया, कोयल
कव्वे और कबूतर
भाते हैं।
इन्हें आप कहीं भी
कभी भी, चलते फिरते
डाल सकते हैं, दाना।
'मोर 'अभिजात्य हैं
और मैं साधारण।
ना  मँहगी पोशाक
ना मँहगा खाना।

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