संयोग या साज़िश
पवन कुमार ‘मारुत’
तीर्थयात्रा पर जाते हुए लोगों को
घूमने जाते हुए पर्यटकों को
हनीमून के लिए गए प्रेमी-प्रेमियों को।
मज़दूरी के लिए जाते ग़रीबों को
ट्रेन में तूड़े की तरह भरे हुए मनुष्यों को।
कैम्प की तरफ़ जाते हुए सेना के जवानो़ को
पाठशाला में पढ़ते हुए बालकों को
आख़िरकार दहशतगर्दों द्वारा
क्यों मार दिया जाता हैं बेरहमी से
अक्सर चुनावों से ऐनवक्त पहले।
यह संयोग है या सोची समझी साज़िश किसी की।
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