दृश्य

पवन कुमार ‘मारुत’ (अंक: 293, फरवरी प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

वह नाक रगड़ता रहता था
अनुनय विनय करता रहता था
पीतल पत्थरों के सामने 
शराफ़त व विनम्रता का पुतला बनकर। 
 
और एक दिन देखा कि उसने
अपने अनुज का गला काट दिया है
एक छोटे से ज़मीन के टुकड़े के लिए॥

0 टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

कविता
विडियो
ऑडियो

विशेषांक में