चाँदी के कड़ूले

15-12-2025

चाँदी के कड़ूले

पवन कुमार ‘मारुत’ (अंक: 290, दिसंबर द्वितीय, 2025 में प्रकाशित)

 

लाश मिली है खेत में, 
ताज़ी-ताज़ी लाश। 
शायद एक-दो दिवस ही हुए है मरे हुए, 
शव औरत का है या आदमी का। 
उड़ती हुई ख़बर मिली कि अधेड़ औरत थी बेचारी। 
 
सनसनी-सी फैल गई पूरे गाँव में, 
सच कहूँ तो आजकल सनसनी कहाँ फैलती है साहब? 
क्योंकि संवेदना-सहेली जो मर चुकी है। 
 
बेरहमी की भी कोई हद होती होगी, 
दोनों पैर ही काट दिए बेचारी बुढ़िया के। 
 
दिल दहल गया था, 
ज़मीन खिसक गई थी पैरों तले की, 
जब पता चला कि क़ातिल कौन है? 
 
कलेजे के टुकड़े ने पैसे माँगे थे, 
माँ ने नहीं दिये तो मारकर दफ़ना दिया था अपने खेत में। 
 
और ले गया चाँदी के कड़ूले काटकर पैरों को, 
क्योंकि शराब पीने की लत थी ज़बरदस्त॥

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