नफ़रत सोच समझकर कीजिए
पवन कुमार ‘मारुत’
नफ़रत नास्तिकों से सब सज्जन करते,
किया क्या क़ुसूर कोई कुछ तो बतलाते।
तौलकर तर्क-तराजू पर परखते हैं,
बात बतलाते सच्ची साथी समझ जाते।
ढोंग-ढकोसलों से करते किनारा केवल,
वैज्ञानिक विचारधारा वाले गीत गाते।
प्रहार पाखण्डों पर करे करारा “मारुत”,
क्या इसलिए उन्हें तुम बुरा बतलाते?
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