जागरण की वेला आई है
पवन कुमार ‘मारुत’
संविधान समापन शोषण का करे कैसे,
मानसिक मूढ़ता रग रक्त-सी भरी है।
वैज्ञानिक विचारधारा विकसित ना करे,
प्राणी पड़ा पूर्ण पाखण्डों में मति मरी है।
बाबा भीम के विचारों को पहचानो पूर्णतः,
सुखकारक संविधान ने बात करी है।
शिकार शोषण के कभी ‘मारुत’ मत बनो,
मस्तक में मूर्खतापूर्ण बातें क्यों भरी है?
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