निष्काम कर्म

15-11-2025

निष्काम कर्म

प्रवीण कुमार शर्मा  (अंक: 288, नवम्बर द्वितीय, 2025 में प्रकाशित)

 

किसी भी कर्म के फल की
जब हम अपने मन में लालसा पालते हैं। 
निश्चित ही उस फल के फलित होने से
हम कोसों दूर होते जाते हैं। 
कर्म फल तभी फलित होता है
जब कोई उसको निष्काम जल से सींचता है। 
हम बेवजह ही फल के चक्कर में भरमाते हैं
कर्म पर पूरा ध्यान न देकर भाग्य के सहारे हो जाते हैं। 
फल की महत्वाकांक्षा ही कर्म हीन बनाती है
भाग्य के सामने इंसांनों को दीन बनाती है। 
जैसे ही फल से दिमाग़ हटता जाता है
मानुष का मन उस कर्म में लगता जाता है। 
एक दिन मंज़िल मिल ही जाती है
कर्म में जैसे जैसे दक्षता आती जाती है। 
फल उसी का वरण करता है
जब कोई अपने कर्मबल से उसका रुख़ मोड़ता है॥

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