मुहब्बत और अखुव्वत के गुलो गुलशन खिलाने हैं
कु. सुरेश सांगवान 'सरू’1222 1222 1222 1222
मुहब्बत और अखुव्वत के गुलो गुलशन खिलाने हैं
नई राहें बनानी हैं नये सपने सजाने हैं
बजाओ कोई ऐसी धुन कि हर कोई थिरक उट्ठे
उसी धुन पर कई नग़मे हमें भी गुनगुनाने हैं
हमारी सोच ही हमको बनाती है नया वरना
वही है आसमां धरती वही मंज़र पुराने हैं
उजालों के नये दीपक नई उम्मीद के तारे
निगाहों में बसाने हैं दिलों में जगमगाने हैं
सबक़ जो भी हैं सिखलाये समय ने, भूलो मत उनको
कमाये तजरुबे हैं जो, वही असली ख़ज़ाने हैं
1 टिप्पणियाँ
-
26 Jan, 2022 05:11 PM
sach mein dil ko chhoo lenr wali aur Motivational gazal. saru ji ko dheron daad ....
कृपया टिप्पणी दें
लेखक की अन्य कृतियाँ
- ग़ज़ल
-
- अगर सारा ज़माना चाहिए था
- अपनी ख़बर मिली न पता आपका मुझे
- अब तो आ बाद-ए- सबा इन बस्तियों के वास्ते
- अश्क जब नैनों में आने लगते हैं
- आओ इक तस्वीर ले लें यार की हंसते हुए
- आँखों में तेरे ही जलवे रहते हैं
- आदमी प्यार में सोचता कुछ नहीं
- आप आये तो बहारों के ज़माने आए
- आपको आज इक नज़र देखा
- आम कीजिए मुझे ख़ास कौन कर गया
- इक बेटी की भाव भीनी श्रद्धांजलि
- इस गली में न उस डगर जाएँ
- इस दुनियाँ-ए-फ़ानी में क्यूँ रोता है
- उसके जाने से है ख़ला कोई
- ए दिल मिरे तू बोल मैं कविता पे कविता क्या लिखूँ
- कहो इश्क़ का आस्ताना कहाँ है
- काम कैसा अजब कर गई ख़्वाहिशें
- कोई अच्छी लगी है सूरत क्या
- कौन समझा है कौन जाना है
- क्या करूँ कोई मुझे जमता नहीं
- क्या पढूँ ग़ज़लें लिखूँ अशआर मैं
- ख़ुद को ऊँचा जो नाप जाता है
- ख़ुदनुमाई के कभी आलम नहीं थे
- ख़ुदा की मेहरबानी या कोई इकराम समझेंगे
- ख़ूबसूरत याद जब तन्हाई को महका गयी
- ख़्वाबों की फ़हरिस्त लगा दी
- गीत ग़ज़लों की ज़ुबाँ थे पहले
- गो कहीं से भी ख़ुशी ले आओ मेरे वास्ते
- चमकते चाँद सी मुस्कान फूलों सी हँसी उसकी
- चरागाँ ये सूरज सितारे न होंगे
- चले आना तेरे रस्ते में मैं पलकें बिछाऊँगी
- चले हैं लोग मैं रस्ता हुआ हूँ
- जवां हो प्यार तो किसको अदाकारी नहीं आती
- जो मिरे सामने नज़ारा है
- तू नज़र आई न
- तेरी संगत से ही राहत होती है
- दिल अगर बीमार सा है सोचिए
- दिल कहाँ मुब्तिला है उसे क्या पता
- दिल का राज़ छुपाना था
- दिलबर की सूरत आँखों में तारी रख
- दिलबर तेरे ख़्याल का पैकर नहीं हूँ मैं
- दुनिया से जुदा प्यार का क़िस्सा है हमारा
- दो दिलों में आशिक़ी का रंग वो पैदा हुआ
- दौर कोई इम्तिहानी चाहिए
- निभाने को रिश्ता झुका तो बहुत हूँ
- नूर चेहरे पे निगाहों में यक़ीं पाते हैं
- परवाने को उधर ही गुज़ारा दिखाई दे
- पेश आते हैं वो प्यार से आजकल
- प्यार के ख़ुशनुमा ज़माने थे
- बच तो नहीं सकेंगे कॅरोना के जाल से
- बे-सबब मुस्कुराना नहीं चाहिए
- भटकते रास्ते हैं और दिल में ग़म-ऐ-जानां है
- मज़े में सुहाना सफ़र कीजिए
- मिरी लाडली है मेरी जान है तू
- मिले हैं सिलसिले ग़म के मुहब्बत के समंदर में
- मुक़द्दर में सभी के बेटियाँ
- मुहब्बत इनायत दुबारा न कर दे
- मुहब्बत और अखुव्वत के गुलो गुलशन खिलाने हैं
- मैं तिरे नज़दीक़ आना चाहती हूँ
- यूँ तेरी याद से राब्ता रह गया
- रंग बदलूं कि रोशनी बदलूं
- रहती है मंज़िल मेरी मुझसे आगे
- राह में हम अपनी ही दीवार बन कर रह गये
- रुक गया है कारवाँ इतवार कैसे हो गया
- रुत बहारों की सुहानी चाहिए
- वफ़ा में चूर गर ये आपकी फ़ितरत नहीं होती
- वस्ल में उनकी तबीयत फ़ाम कर लें
- वही ग़लती दुबारा क्यूँ करे कोई
- वो लम्हा जो तुमको छूकर जाता है
- सहरा कहीं हयात कहीं दाम आ पड़ा
- साथ गर आपका नहीं होता
- साँसों में जब तक रफ़्तारी रहती है
- हम पुकारा किए ज़िंदगी ज़िंदगी
- हर किसी से न वास्ता रखना
- हर जगह हर पल तुझे ही ढूँढती रह जाएगी
- है इश्क़ अब ताजिराना कैसा
- है ख़ाली अभी सर में सौदा नहीं है
- नज़्म
- कविता
- विडियो
-
- ऑडियो
-