इंसान हो जाना चाहता हूँ

15-02-2026

इंसान हो जाना चाहता हूँ

प्रवीण कुमार शर्मा  (अंक: 293, फरवरी प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

मैं स्वाभिमान में माउंट एवरेस्ट
चढ़ जाना चाहता हूँ। 
मैं विनम्रता में मारियाना गर्त
छू लेना चाहता हूँ। 
मैं क्रोध में शेषनाग की
फुंकार हो जाना चाहता हूँ। 
मैं शान्ति में राम
बन जाना चाहता हूँ। 
मैं निर्धनता में सुदामा तो
वैभव में द्वारकाधीश हो जाना चाहता हूँ। 
मैं क्षमा में विष्णु और
दंड देने में शिव हो जाना चाहता हूँ। 
मैं मित्रता में कर्ण तो
शत्रुता में अर्जुन हो जाना चाहता हूँ। 
मैं शक्ति में हनुमान तो
शक्ति हीनता में इंसान हो जाना चाहता हूँ। 
मैं ध्यान में बुद्ध
तो ज्ञान में महावीर हो जाना चाहता हूँ। 
मैं न तो देवता और न ही भगवान बन जाना चाहता हूँ
बल्कि मैं तो कुछ अच्छाई और कुछ बुराई का संगम
अर्थात्  इंसान हो जाना चाहता हूँ। 

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