गीत ग़ज़लों की ज़ुबाँ थे पहले

15-11-2019

गीत ग़ज़लों की ज़ुबाँ थे पहले

कु. सुरेश सांगवान 'सरू’

गीत ग़ज़लों की ज़ुबाँ थे पहले
आप लफ़्ज़ों में निहाँ थे पहले 


आपको ख़ाक़ नज़र आते हैं
हम पटाख़ों की दुकाँ थे पहले  


चुभ गये ख़ार हज़ारों दिल पे
ये बहारों के निशाँ थे पहले 


इक तुम्हीं तो मिरे अपने थे यहाँ
तुम रक़ीबों में कहाँ थे पहले


प्यार मिलता है यहाँ क़िस्मत से 
ये तुम्हारे ही बयाँ थे पहले


हम लड़ा बैठे तुम्हीं से अँखियाँ
और भी कितने यहाँ थे पहले


ध्यान आया है अभी अपना 'सरु'
हम ज़माने में रवाँ थे पहले

1 Comments

  • 6 Nov, 2019 09:27 PM

    Speechless !!!!

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