इस निशा में
अनिमा दास
मूल सॉनेट (आजि राति रे): सॉनेटियर गिरिजाकुमार बलीयारसिंह
अनुवाद: अनिमा दास सॉनेटियर
(सॉनेट)
दूँगा मैं इस निशा में चंपाकली को प्रणयसिक्त चुंबन
करूँगा निर्मित मैं एक गमकते परागों का अनुबंधन
रहूँगा अनिद्र, इस निशा में, करूँगा व्यतीत प्रहर प्रहर
करूँगा अंकित इस निशा में आशाओं की एक लहर
रचूँगा मैं त्वत्परित इस निशा में कोमल करों की कारा
करूँगा मैं रिक्त कादंबरी कलश से मधुर अमिय धारा
चुंबन से करूँगा सिक्त तुम्हारा अल्प रक्तिम मुखमंडल
करूँगा प्रश्न इस निशा में कैसे हुई तुम प्रसून से पुष्पदल
इस निशा में सुनूँगा मैं तुम्हारे हृदय गह्वर का मृदु कंपन
करूँगा मैं तुम संग निशांत पर्यंत . . . मधुर-रास विनोदन
स्पर्श करूँगा मैं इस निशा में स्वप्न तरल तीव्र तमिस्र के
कामना होगी मौन सम्मति की तुम्हारे अतृप्त अधरों से
इस निशा में, मैं लिखता जाऊँगा मेरीअनुच्चरित इच्छाएँ
यदि स्वर्णिम ऊषा में न मैं देख पाऊँ तुम्हारी सिंदूर-रेखाएँ।
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