मौसम

शैलेन्द्र चौहान (अंक: 300, जुलाई प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

मौसम बदला है
बारिश है, ठंडक है
न्यूमार्केट की सड़कों पर
हल्की-हल्की धुँध उतर आई है
पेड़ों की भीगी शाखाओं में
वसंत जैसे
थोड़ी देर के लिए ठहर गया है
मानो उसे भी
इस नमी में
कुछ पुरानी स्मृतियाँ सुनाई दे रही हों
 
आसमान धूसर है
लेकिन उसके नीचे
ट्यूलिप, क्रैब-एपल और चेरी के फूल
अब भी अपने रंगों पर अड़े हैं
जैसे चुप्पी के बीच
जीवन का छोटा-सा उल्लास 
 
सड़क किनारे बस-स्टॉप
भीगे हुए काँच में चमकते हैं
कॉफ़ी की दुकानों से उठती भाप
हवा में घुलती जाती है
लोगों के हाथों में
गर्म लंबे मग हैं
और चेहरों पर
अपने-अपने दिनों की चुप्पियाँ
 
बाहर
बारिश में धीमे चलते वाहन
पानी पर रोशनियों की लकीरें बनाते हैं
और किसी पार्क में
भीगी घास पर
कुछ लोग बिना बोले खड़े हैं
 
बच्चों के झूले
बारिश से धुलकर
एकदम साफ़ हो गए हैं
जैसे किसी ने
उन पर जमी हुई थकान
धीरे से पोंछ दी हो
 
ऐसे मौसम में
घर की खिड़की से बाहर देखते हुए
अक्सर दूर कोई छोटा शहर याद आता है
जहाँ बारिश
सिर्फ़ मौसम नहीं होती
वह आती है
मिट्टी की गंध लेकर
भीगती गलियों
टीन की छतों
चाय की दुकानों
और आवाज़ों से भरी दुनिया के साथ

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