हाई पार्क, चेरी ब्लॉसम और बच्चे

01-07-2026

हाई पार्क, चेरी ब्लॉसम और बच्चे

शैलेन्द्र चौहान (अंक: 300, जुलाई प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

वसंत ने
हाई पार्क में
धीरे से खोली है अपनी गठरी
और चेरी ब्लॉसम के पेड़ों पर
सफ़ेद-गुलाबी उजाला टाँग दिया है। 
पेड़ ऐसे लगते हैं
जैसे बादलों ने
कुछ देर के लिए
धरती पर डेरा डाल दिया हो
 
स्कूल से आए
बच्चे दौड़ रहे हैं
हवा में उछालते हुए अपनी हँसी
जैसे दुनिया अब भी
एक सुरक्षित जगह हो
 
एक बच्ची
गिरती हुई पंखुड़ियों को पकड़ने की कोशिश में
बार-बार उछलती है
और हर बार
उसकी हथेली में
सिर्फ़ हवा आती है
 
कोई लड़का
पेड़ के नीचे खड़े होकर
अपनी माँ की तस्वीर खींच रहा है
उसे शायद अभी नहीं मालूम
कि स्मृतियाँ भी
धीरे-धीरे फूलों की तरह झरती हैं
 
चारों तरफ़
मोबाइल कैमरे हैं
पर बच्चों की आँखों में
अब भी बची हुई है
सीधी, अनगढ़, पहली ख़ुशी
 
पार्क में ट्रेल पर 
साइकिल दौड़ा रहे हैं बच्चे
घंटियाँ बजाते
हवा को चीरते
अपने पुष्ट होते पैरों से
धरती की उदासी को पीछे छोड़ते हुए
 
चेरी ब्लॉसम
हर साल आता है
कुछ दिनों के लिए
और चला जाता है
लेकिन बच्चे
हर बार उसे 
पहली बार की तरह देखते हैं
शायद इसी वजह से
दुनिया अभी तक
पूरी तरह बूढ़ी नहीं हुई है

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