अलग दुनिया 

01-07-2026

अलग दुनिया 

शैलेन्द्र चौहान (अंक: 300, जुलाई प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

यह एक अलग ही दुनिया है
हमारी धरती से बहुत दूर
बहुत अलग
 
यहाँ सुबहें
धीरे-धीरे खुलती हैं
कॉफ़ी की भाप
और शांत सड़कों के बीच
लोग समय को
घड़ी की सुइयों में बाँधकर चलते हैं
सब सुव्यवस्थित, स्वच्छ और सहज 
मानो जीवन
किसी अदृश्य अनुशासन में साँस लेता हो
 
मुस्कानें विनम्र हैं
पर दूरियाँ भी उतनी ही सलीक़ेदार
यहाँ पड़ोसी
बरसों साथ रहकर भी
अजनबी बने रहते हैं
और बच्चे
बहुत जल्दी
अपने-अपने कमरों और सपनों में बड़े हो जाते हैं
 
बच्चों के कंधों पर
बस्तों से अधिक
आत्मविश्वास दिखाई देता है
वे साइकिलों पर नहीं
मानो हवा पर दौड़ते हैं
 
पेड़ों पर
सिर्फ़ पत्तियाँ नहीं
रंग उगते हैं
लाल, पीले, नारंगी
जैसे मौसम
अपने कपड़े बदल रहा हो
 
झीलें
अपने भीतर
पूरा आकाश समेट लेती हैं
और पक्षियों की आवाज़ें
किसी अनजानी भाषा की तरह
धीरे-धीरे समझ में आती हैं
 
यहाँ का जीवन
हमारे जीवन से अलग है
अलग चाल
अलग आदतें
अलग रिश्ते
अलग तरह की व्यस्तताएँ
 
यहाँ वसंत
सिर्फ़ एक मौसम नहीं
लंबी बर्फ़ीली चुप्पी के बाद
जीवन का लौटना है
 
फिर भी
कभी अचानक
किसी आवाज़ में
टिटहरी की गूँज सुनाई देती है
किसी पेड़ की छाँव में
अपने आँगन की स्मृति उतर आती है
और किसी बच्चे की हँसी में
बीता हुआ समय
धीरे से लौट आता है
 
तब लगता है
दुनिया चाहे कितनी बदल जाए
मन अपनी मिट्टी
अपने लोगों
अपनी भाषा
और अपनी स्मृतियों से
पूरी तरह अलग नहीं होता

0 टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

कविता
साहित्यिक आलेख
ललित निबन्ध
हास्य-व्यंग्य आलेख-कहानी
ऐतिहासिक
पुस्तक समीक्षा
स्मृति लेख
यात्रा-संस्मरण
सिनेमा और साहित्य
सामाजिक आलेख
पुस्तक चर्चा
आप-बीती
कहानी
काम की बात
विडियो
ऑडियो

विशेषांक में

लेखक की पुस्तकें