हलधर नाग का काव्य संसार

हलधर नाग का काव्य संसार  (रचनाकार - दिनेश कुमार माली)

छंदा चरण अवतार

 

(कलाकार छंदा चरण आचार्य के जीवन-त्याग के समय उनके विचार) 
 
चाँदनी रात किया फूल जैसी सफ़ेद, 
मछली के छिलके की तरह बादल 
इमली-पेड़ जैसे सफ़ेद रंग का 
उड़ता सारस-युगल। 
 
गुच्छा-गुच्छा खिले कदम्ब, 
चारों तरफ़ सुगंधित वातावरण 
मन यमुना का टूटा तीर, 
लहरो-कहर से बाढ़ का आस्तरण। 
 
रोशन हुआ वृंदावन, 
हुरहुराती पवन 
बजाने लगा बाँसुरी, 
विचलित हुआ राधा का मन। 
 
दौड़ती आई बंशी-धुन, 
बाँधा मुझे प्रेम-डोर 
जहाँ होता मन का मिलन, 
चमेली-खुशबू फैलती चहुँ-ओर। 
 
गोप-लीला हो गई ख़त्म, 
कदम्ब गया मुरझा 
सूखी मन यमुना, 
बंशी टूटी झंझा। 
 
नहीं राधा का पृथ्वी पर भाव 
राधा चली गई दूसरे ठाव 
राधा का हुआ महाप्रस्थान 
दे गई मुझे छंदा चरण जीवन। 
 
आ रहा हूँ राधा, रुको ज़रा 
नहीं रहूँगा और मृत्य-लोक 
तू मैना, मैं तोता 
उड़ चले बादलों के उस ओर। 
 
बनाएँगे शिवाली की डोली, 
झूलेंगे सूर्य किरण 
छंदा चरण का अवतार, 
आज होगा पूरण। 

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