हलधर नाग का काव्य संसार

हलधर नाग का काव्य संसार  (रचनाकार - दिनेश कुमार माली)

लालटेन

 

ऊपर लगा निर्मल काँच, 
जल रही भीतर हिंसा की लौ 
ईंधन है धन, 
इसलिए भभकती ज़्यादा लौ। 
 
जब तेज़ हो जाती है आग
टूट जाता है काँच 
भीतर हिंसा की आग, 
दुर्योधन का सत्यानाश। 

<< पीछे : अछूत–(101-208)  आगे : अग्नि >>

लेखक की कृतियाँ

साहित्यिक आलेख
व्यक्ति चित्र
पुस्तक समीक्षा
अनूदित कहानी
बात-चीत
ऐतिहासिक
कार्यक्रम रिपोर्ट
अनूदित कविता
यात्रा-संस्मरण
रिपोर्ताज
विडियो
ऑडियो

विशेषांक में