हलधर नाग का काव्य संसार

हलधर नाग का काव्य संसार  (रचनाकार - दिनेश कुमार माली)

नींद 

 

झूम झूमाती झूमरावती, 
आती क्यों हो अब? 
पलकें मेरी झपक रही, 
चेतना जा रही डूब। 
 
माँ सरस्वती आएगी-सोचकर, 
कर रहा हूँ इंतज़ार 
यदि तुम मुझे सुलाओगी, 
भूल जाऊँगा कविता की गार। 
 
जुहार करता ऐसे समय 
न आओ मेरे पास 
टकराकर मेरे सुखद संसार से, 
करो न मेरा जीवन नाश। 
 
तुम्हारे आशीर्वाद से बँधी हैं, 
छप्पन कोटि जीवों की आस 
मेरे हिस्से के दो टुकड़े कर, 
एक रख लो अपने पास। 
 
एक टुकड़ा मुझे देना, जब मैं जाऊँ थक, 
और करूँ तुम्हारा चिंतन 
सुबह लगेगा पेट का फेरा, 
करना पड़ेगा मंथन। 
 
तुम्हारी गोद का सुख अमीरों के लिए, 
जो पहनते रेशम
लोलुपता, धन की बर्बादी, 
मुझे नहीं पसंद। 
 
इधर-उधर, नहीं वे स्थिर 
भागता रहता मन 
दौड़ते रहते हवाई घोड़े, 
सात-सिंधु के पवन। 
 
जीवन-सलीता जलती जाती, 
ख़त्म हो रहा तेल 
इस वक़्त ठेलाठेली
गुज़र चुकी जब बेल। 
 
अगर देती हो गहरी नींद 
रुक, बस थोड़ी देर 
श्मशान में सो जाऊँगा, 
अपने पाँव पसार। 
 
सारस्वत कवि पद 
रहेंगे अमर 
माटी पुतला माटी में मिलेगा 
नष्ट हो जाएगा शरीर। 

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