हलधर नाग का काव्य संसार

हलधर नाग का काव्य संसार  (रचनाकार - दिनेश कुमार माली)

बारिश 

 

सूरज डूबते ही जुगनू 
फैल जाते हर स्थान 
कालाहांडी मेघ घुमड़ते 
आते उत्तर पश्चिमी कोन। 
 
हवा के झोंकों की सरसराहट, 
चारों तरफ़ धूल के ग़ुबार
छतों की किनार से गिरता पानी, 
बरसता मूसलधार। 
 
बादलों की गर्जन, 
बिजली गिरती मल-मल 
खेतों में, गाँव की सड़कों पर, 
धाराएँ बहती खल-खल। 
 
कीटों की चीत्कार, झींगुरों की झिंकारी, 
हर जगह किलकिली 
उषत मन से वर्षा-वंदना के लिए, 
मेंढक करता हुलहुली। 
 
उदार लोग रखते बचाकर, 
अपनी मेहनत का धन 
बारिश की तरह देते दान, 
परहितार्थ तन-मन-धन। 

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