हलधर नाग का काव्य संसार

हलधर नाग का काव्य संसार  (रचनाकार - दिनेश कुमार माली)

गर्मी 

 

चैत ख़त्म, वैशाख शुरू, 
तपने लगा सूरज 
नदी-नाले सूखे खड़-खड़, 
दूब-लता गए मुरझा। 
 
भूमि दर्दरित, सूरज गर्मी से, 
बहने लगी हवा लू
जंगल में लगी आग, 
किसे क्या कहूँ। 
 
सुखी पसीना-पर्पट शरीर पर नमक बन, 
चुभन भरी ग्रीष्म 
विकल मन बड़ा कलबल, 
असहायता भेदती मर्म। 
 
प्यास से सूखता गला बार-बार, 
नाक-कान जलते भभक-भभककर 
कब ख़त्म होगी यह गर्मी? 
आओ, वर्षा घमक-घमककर। 
 
जितनी ज़्यादा गर्मी, उतनी ही वर्षा 
पूर्वजों की यह कथा 
“दुख सहोगे, मिलेगा सुख, 
याद रखो, मेरे बेटा” 

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