स्वर की महिमा

नरेंद्र श्रीवास्तव

अ-अड़ियल कभी बनो नहीं।
आ-आज्ञा सदा बड़ों की मानो॥

इ-इधर-उधर न घूमो फिरो।
ई-ईश्वर सर्वज्ञ है जानो॥

उ-उज्ज्वल भविष्य बने तब ही।
ऊ-ऊब न श्रम में आवे॥

ए-एड़ी चोटी एक करोगे।
ऐ-ऐसा महान बनावे॥

ओ-ओज बनेगा चरित्र से ही।
औ-और मान बढ़ेगा जग में॥

अं-अंतःकरण शुद्ध रखोगे।
अः-अःहा! कहोगे पग-पग में॥

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