फरवरी

सुषमा दीक्षित शुक्ला  (अंक: 293, मार्च प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

प्रेम के गीत गाती है ये फरवरी। 
दिल से दिल को मिलाती है ये फरवरी। 
रूप के रंग सजाती है ये फरवरी। 
प्रेम के गीत गाती है ये फरवरी। 
 
वैलेंटाइन के दिन सब दिखे प्यार में। 
इक ख़ुमारी सी छाई है दीदार में। 
फूल खिलते ही रहते हैं संसार में। 
  
प्यार के गुल खिलाती है ये फरवरी। 
प्रेम के गीत गाती है ये फरवरी। 
दिल से दिल को मिलाती है ये फरवरी। 
रूप के रंग सजाती है ये फरवरी 
 
महफ़िलें हैं सजी शमा परवानों की। 
लिख रही दस्ताने हैं दीवानों की। 
इश्क़ की बाते है दिल के अफ़सानों की। 
 
मन की महफ़िल सजाती है ये फरवरी। 
प्रेम के गीत गाती है ये फरवरी। 
दिल से दिल को मिलाती है ये फरवरी। 
रूप के रंग सजाती है ये फरवरी। 
 
हैं गुलाबों की डालें महकने लगी। 
ये नशीली फ़िज़ाएँ बहकने लगीं। 
अब तो आमों पे कोयल चहकने लगी। 
 
साल भर बाद आती है क्यूँ फरवरी। 
जवां धड़कन जगाती है ये फरवरी। 
प्रेम में गीत गाती है ये फरवरी। 
दिल से दिल को मिलाती है ये फरवरी। 
रूप के रंग सजाती है ये फरवरी।

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